देश का इकलौता सूर्य प्रधान मंदिर, जहां मकर संक्रांति पर उमड़ता श्रद्धालुओं का जमावड़ा, मिलती नौ ग्रहों की कृपा
अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार नए साल में मकर संक्रांति का यह पर्व हिंदू धर्म का पहला त्यौहार माना जाता है. वही, ज्योतिष शास्त्र में भी मकर संक्रांति का विशेष महत्व है. इस दिन सूर्य देव उत्तरायण हो जाते है. इस खास मौके सूर्यदेव सहित नवग्रह की कृपा पाने के लिए मध्य प्रदेश के खरगोन में मौजूद देश के इकलौते सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर में पूरे प्रदेश से भक्त दर्शन, पूजन के लिए पहुंचते है. माना जाता है कि, मकर संक्रांति के दिन यहां भगवान सूर्य के दर्शन से पूरे साल नवग्रह की कृपा मिलती है.
दरअसल, खरगोन शहर में कुंदा नदी के तट पर करीब 300 वर्ष प्राचीन सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर है. जो ज्योतिष शास्त्र के पूर्ण पैरामीटर और गणित ज्ञान के हिसाब से बना देश का एकमात्र मंदिर कहलाता है. जिस प्रकार मानव जीवन सात दिन, 12 राशियों, 12 महीनों और नौ ग्रहों पर आधारित है. उसी प्रकार इस मंदिर की संरचना हुई है. सूर्य प्रधान मंदिर होने से मकर संक्रांति पर नवग्रह की कृपा पाने के लिए लाखों श्रद्धालु आते है.
मकर संक्रांति पर दर्शन का अधिक महत्व
यह मंदिर देश का इकलौता नवग्रह मंदिर है. शेष शनि मंदिर है. यहां गर्भगृह में स्वयं भगवान सूर्यदेव नौ ग्रहों के साथ विराजमान है. सूर्य उपासना के महापर्व मकर संक्रांति के दिन उदयमान सूर्य एवं गर्भगृह में विराजित सूर्य देव के दर्शन और पूजन का यहां खास महत्व रहता है. इस दिन पूजन करने से साल भर नवग्रह की कृपा मिलती है. इस वजह से जिस भी गृह संबंधित समस्या होती है, उस ग्रह सम्बंधित दान पोटली अर्पित करने से तुरंत फल की प्राप्ति होती है. पूरे
दक्षिण भारतीय शैली में बना है मंदिर
बता दें कि, नवग्रह मंदिर के गर्भगृह में ग्रहों की अधिष्ठात्री मां बगलामुखी भी स्थापित होने से पीताम्बरी ग्रह शांति पीठ भी कहलाता है. जबकि ब्रह्मांड की दो महाशक्तियां भी यहां स्थापित है. सभी नौ ग्रह एवं अन्य मूर्तियां और मंदिर की संरचना दक्षिण भारतीय शैली की है. गर्भगृह में सूर्य की मूर्ति बीच में है. सामने शनि, दाईं ओर गुरु, बाई ओर मंगल ग्रह की मूर्ति है. सभी ग्रह अपने-अपने वाहन, ग्रह मंडल, ग्रह यंत्र, ग्रह रत्न और अस्त्र शस्त्र के साथ स्थापित है.
मथुरा में बाल कृष्ण के दर्शन को आए भगवान शिव, क्यों कहलाते हैं ‘शहर के कोतवाल’?
चाणक्य का बड़ा दावा—शादीशुदा ही बने शासक, तभी मजबूत होगा देश
सावधान! बच्चों के ये नाम बन सकते हैं परेशानी की वजह, जानिए क्यों
हौसलों को मिला सहारा, दिव्यांगजनों की बदली जिंदगी
सशक्त नारी, विकसित प्रदेशः ‘बिहान’ से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनीं सकीना
मुंबई में आयोजित वर्ड पावर चैंपियनशिप 2026 में छठवां स्थान हासिल किया छात्र रोशन निषाद ने
फूलों की खुशबू से महकी किस्मत ईश्वरचरण पैकरा का