मध्य प्रदेश में स्मार्ट मीटर
एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल का दावा मध्य प्रदेश में स्मार्ट मीटरों के संबंध में एक महत्वपूर्ण चिंता को उठाता है। स्मार्ट मीटर एक प्रकार का आधुनिक मीटर है, जो उपभोक्ताओं के बिजली उपयोग की वास्तविक समय में निगरानी करता है और स्वचालित रूप से डेटा भेजता है, जिससे बिजली वितरण कंपनियों को बिलिंग और निगरानी में सुविधा होती है।
हालांकि, एक बड़ा सवाल यह है कि इन स्मार्ट मीटरों की कीमत वर्तमान में उपभोक्ताओं से नहीं ली जा रही है, लेकिन अगले 10 सालों में इसके लिए किस्तें वसूलने का प्रावधान हो सकता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि जब स्मार्ट मीटर की लागत पूरी तरह से तय की जाएगी, तो सरकार या संबंधित कंपनियां उपभोक्ताओं से किश्तों के रूप में राशि वसूलेंगी।
राजेंद्र अग्रवाल ने इस पर आपत्ति जताई है क्योंकि यह उपभोक्ताओं पर एक अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल सकता है, जो उन्हें अप्रत्याशित रूप से भुगतना पड़ सकता है। साथ ही, यह सवाल भी उठता है कि क्या इस तरह की योजना पारदर्शी तरीके से उपभोक्ताओं को पहले से सूचित की गई थी या नहीं।
यदि यह योजना लागू होती है, तो इसे लेकर उपभोक्ताओं के बीच असंतोष और विरोध भी हो सकता है, क्योंकि इस तरह की अतिरिक्त लागत उनकी बिजली की मासिक बिलिंग में जोड़ दी जाएगी।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: ग्वालियर लोकायुक्त ने रंगे हाथ दबोचा घूसखोर क्लर्क, 60 हजार में तय हुआ था सौदा।
भोपाल में 50 हजार शिक्षकों की हुंकार: "25 साल की सेवा के बाद अब परीक्षा की कैसी शर्त?"
तालाब में नहाने गई चार सहेलियां डूबीं, दो को ग्रामीणों ने बचाया, दो की दर्दनाक मौत
प्रशासनिक लापरवाही की इंतहा: सरकारी कागजों में मार दिए गए 17 जिंदा वोटर, कलेक्टर सख्त
Health Tips: पाचन तंत्र को लोहे जैसा मजबूत बना देगा 30/30/3 नियम, आज ही करें ट्राई।
भाई की शादी में शामिल होगा दुष्कर्म का दोषी, पुलिस की चूक के बावजूद मिली सशर्त पेरोल
ममता के गढ़ में CM यादव का 'डोर टू डोर' कैंपेन, सत्ता परिवर्तन का किया दावा
INS ध्रुव की समंदर में एंट्री: पाकिस्तान की हर मिसाइल टेस्टिंग पर होगी भारत की पैनी नजर
ऐतिहासिक दौरा: पहली बार भारत-श्रीलंका को छोड़ सीधे नेपाल पहुँच रहे हैं अमेरिकी राजनयिक कपूर
एस. जयशंकर का विपक्ष पर प्रहार: कहा- देश ने देख लिया महिला विरोधी दलों का असली चेहरा