एमपी के निगम-मंडलों में जल्द होंगी नियुक्तियां, दिल्ली से आई हरी झंडी
भोपाल: मध्यप्रदेश की राजनीति में एक दो दिन में बड़ा उठापटक होने जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के दिल्ली दौरे के बाद यह कयास लगने लगे हैं कि सूची फाइनल हो चुकी है। जी हां, इस सूची में निगम-मंडलों में राजनीतिक नियुक्तियों से संबंधित है। सत्ता-संगठन में तालमेल के लिए नई दिल्ली में गुरुवार रात मध्यप्रदेश के सांसदों की बैठक हुई। नई दिल्ली के एमपी भवन में संपन्न हुई इस बैठक की खास बात यह है कि इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ ही पूर्व सीएम केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह, सह प्रभारी सतीश उपाध्याय, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद सहित लोकसभा एवं राज्यसभा के सांसद शामिल हुए।
क्षेत्रीय-सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश
इस बैठक में क्षेत्रीय-सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की गई। इशारों ही इशारों में सबको साधने की कोशिश कर ली गई। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद वे गृहमंत्री अमित शाह के अलावा अन्य बड़े नेताओं से भी मिले। संगठन के नेताओं से भी उनकी चर्चा हुई। इसके बाद मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने के बाद अब निगम-मंडल, बोर्ड और आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों का रास्ता खुल गया है। ऐसे में जल्द ही कई पदों पर नई नियुक्तियों की घोषणा हो सकती है। दरअसल, पिछले दिनों ओबीसी आयोग के अध्यक्ष पद पर रामकृष्ण कुसमारिया की नियुक्ति हुई है। इसके बाद अब निगम-मंडल, बोर्ड, आयोग और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर हलचल तेज हो गई है। चर्चा है कि खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद अनुमोदित सूची में शामिल नामों की नियुक्तियों के आदेश जारी करेंगे।
ऐसे किया गया चयन
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखा है। पूर्व मंत्री, संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और कुछ वर्तमान विधायकों को भी शामिल किया गया है। गौरतलब है कि वर्तमान में राज्य में निगम-मंडल, बोर्ड और आयोगों के लगभग तीन दर्जन से अधिक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद रिक्त हैं। डॉ. मोहन यादव ने लोकसभा चुनाव से पहले 45 निगम-मंडलों और बोर्डों में की गई पूर्ववर्ती नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। तब से यह पद रिक्त हैं।
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