संतान प्राप्ति की कामना और दीर्घायु होने के लिए हर माताएं करती हैं जितिया व्रत
जितिया व्रत माताओं द्वारा अपने पुत्र की दीर्घायु, आरोग्य और उज्जवल भविष्य की कामना के लिए किया जाता है. यह व्रत निर्जला उपवास करके संतान के उज्जवल भविष्य की प्रार्थना की जाती है. आइये जानते हैं इस व्रत के बारे में…
जानें इस व्रत का महत्व
पूर्णिया के पंडित मनोतपल झा बताते हैं कि जितिया व्रत को जीवितवाहन व्रत भी कहा जाता है. यह व्रत माताएं संतान की लंबी आयु, सुख-शांति और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए करती हैं. इस बार माताओं को व्रत के दौरान किसी भी तरह का तनाव नहीं होगा, वे बेफिक्र होकर अपने संतान की आरोग्यता की कामना कर सकती हैं.
जानें व्रत की तिथि और समय
इस बार जितिया व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाएगा, जो 14 सितंबर, रविवार को पड़ेगा. मिथिला पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 14 सितंबर को सुबह 8:50 बजे प्रवेश करती है. विभिन्न जगहों पर समय का कुछ अंतर देखा जा सकता है, लेकिन व्रत 14 सितंबर को ही मनाया जाएगा. इस दिन माताएं निर्जला व्रत रहकर संतान की सुख-शांति के लिए आराधना करेंगी और अगले दिन, यानी 15 सितंबर को सुबह 6:35 बजे व्रत का पारण करेंगी.
जानें इस बार के व्रत की अवधि
यह जितिया व्रत हर साल लगभग 72 घंटे का होता था, जो महिलाओं के लिए तनावपूर्ण होता था. इस बार माताएं केवल 24 घंटे के लिए जितिया व्रत करेंगी.
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