लहजा बता रहा है कि स्वामी प्रसाद घर वापसी के लिए हो रहे हैं बेचैन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में कभी ओबीसी समाज के बड़े नेता माने जाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य इन दिनों अपने सियासी भविष्य की तलाश में बेचैन नज़र आ रहे हैं। बसपा छोड़कर भाजपा और फिर सपा का दामन थामने के बाद मौर्य ने अपनी अलग पार्टी बनाई, लेकिन अपेक्षित राजनीतिक ज़मीन हासिल नहीं कर पाए। अब उनके तेवर इशारा कर रहे, कि वह दोबारा बसपा में लौटने की कोशिश कर रहे हैं।
दरअसल ग़ाज़ीपुर में गुरुवार को आयोजित सभा में मौर्य ने भाजपा और सपा दोनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दोनों दल एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं और दोनों ने ही गुंडाराज और लूट को बढ़ावा दिया। दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने बसपा को लेकर कोई आलोचना नहीं की, बल्कि मायावती की तारीफ़ करते हुए उन्हें अब तक का सबसे बेहतर मुख्यमंत्री तक बता दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य की यह नरमी उनकी ‘घर वापसी’ की तैयारी है। खुद मौर्य ने भी कहा है कि अगर मायावती बाबासाहेब आंबेडकर के मिशन पर लौटती हैं, तो उन्हें बसपा से हाथ मिलाने में कोई आपत्ति नहीं होगी। दरअसल, सपा छोड़ने के बाद मौर्य का राजनीतिक प्रभाव लगातार कमज़ोर हुआ है। उनकी परंपरागत सीट ऊँचाहार में बाबू सिंह कुशवाहा ने सक्रियता बढ़ाकर मौर्य समाज को बांट दिया है। इससे उनकी स्थिति और कमजोर हो गई है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि क्या मायावती उन्हें दोबारा पार्टी में जगह देंगी। बसपा सूत्रों का कहना है कि मौर्य ने पार्टी छोड़ने के बाद मायावती और संगठन पर तीखे हमले किए थे, जिसके चलते वापसी आसान नहीं होगी। उनकी बेटी संघमित्रा मौर्य ने भी हाल ही में मायावती से मुलाक़ात की थी, लेकिन अभी तक कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं। ऐसे में साफ़ है कि स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी सियासी ज़मीन बचाने के लिए बसपा को एकमात्र ठिकाना मान रहे हैं। अब देखना यह है कि मायावती उन्हें दोबारा हाथी पर सवार होने का मौका देती हैं या नहीं।
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