36 साल बाद परिवार को झटका, बेटा नक्सली बनकर ATS की गिरफ्त में
उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की वाराणसी इकाई ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन सीपीआई (माओवादी) के हार्डकोर नक्सली सीताराम उर्फ विनय को गिरफ्तार किया है | उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वह बीते कई वर्षों से फरार चल रहा था. एटीएस ने उसे सोमवार को वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन से उस समय गिरफ्तार किया, जब वह भेष बदलकर कहीं और फरार होने की कोशिश में था |
गिरफ्तार नक्सली सीताराम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के मनियर थाना क्षेत्र के मुड़ियार गांव का रहने वाला है. बताया जा रहा है कि वह पहचान छिपाने और भेष बदलने में बेहद माहिर था | इसी वजह से वह लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहा. एटीएस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तारी के वक्त भी वह यात्रा की तैयारी में था और किसी दूसरे राज्य में शरण लेने की फिराक में था |
1986 में ही अपना घर छोड़ा
सीताराम ने वर्ष 1986 में ही अपना घर छोड़ दिया था और माओवादी विचारधारा से जुड़ गया था. इसके बाद उसने संगठन में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत की. वह सीपीआई (माओवादी) और उससे जुड़े संगठनों में अहम पदों पर रहा. एक समय वह माले की सेंट्रल कमिटी का जोनल सेक्रेटरी भी रह चुका है | संगठन के विस्तार, रणनीति और कैडर निर्माण में उसे लंबा अनुभव हासिल था. सीताराम को संगठन के ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) की बैठकें कराने और युवाओं को नक्सल विचारधारा से जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी |
UP-बिहार में कई मामले दर्ज
उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार के मुजफ्फरपुर, बांका और सीतामढ़ी जिलों में कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं | इन मामलों में हत्या, बैंक डकैती, मारपीट और अवैध हथियार रखने जैसे संगीन आरोप शामिल हैं. लंबे समय से फरार रहने के कारण सुरक्षा एजेंसियां उसे एक बड़े खतरे के रूप में देख रही थीं |
एटीएस सूत्रों के मुताबिक, सीताराम की गतिविधियों पर काफी समय से इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए नजर रखी जा रही थी | सोमवार दोपहर एटीएस को पुख्ता सूचना मिली कि वह काशी रेलवे स्टेशन पर मौजूद है और वहां से फरार होने की योजना बना रहा है. सूचना मिलते ही एटीएस टीम ने तुरंत स्टेशन पर घेराबंदी की और उसे धर दबोचा |
फिलहाल सीताराम से पूछताछ की जा रही है. एटीएस को उम्मीद है कि उसकी निशानदेही पर अन्य सक्रिय नक्सलियों, ओवर ग्राउंड वर्कर्स और संगठन के नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में अहम जानकारियां मिल सकती हैं |
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