मुकेश छाबड़ा बोले—मेरे ऑफिस पहुंचना सबसे आसान है
‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ में कास्टिंग करने के बाद से मुकेश छाबड़ा लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। मुकेश अक्सर ये कहते रहते हैं कि वो नए कलाकारों को मौका देते हैं। अब एक बार फिर उन्होंने कहा कि उनका ऑफिस देशभर के उभरते कलाकारों के लिए खुला है। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में सफलता के लिए सुलभता, कड़ी मेहनत और टेलेंट को सबसे जरूरी बताया। जानिए क्यों कास्टिंग डायरेक्टर ने कहा कि उनके ऑफिस तक पहुंचना सबसे आसान है?
टीम वर्क और कड़ी मेहनत से मिली सफलता
एएनआई से बातचीत में मुकेश छाबड़ा ने अपनी सफलता और नए कलाकारों को मौका देने को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि मेरी सफलता का कोई रहस्य नहीं है, बल्कि यह कड़ी मेहनत, टीम वर्क और फिल्म निर्माताओं द्वारा दिए गए अवसरों के कारण है। यह ईश्वर की कृपा और मेरी मां का आशीर्वाद है। पूरी टीम कड़ी मेहनत करती है। इसका श्रेय उन निर्देशकों और निर्माताओं को जाता है जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया।
पूरे हिंदुस्तान को पता है मेरा ऑफिस किधर है
नए कलाकारों के लिए सुलभता पर जोर देते हुए मुकेश ने कहा कि उभरते कलाकार कई माध्यमों से आसानी से मुझसे संपर्क कर सकते हैं। मेरे ऑफिस तक पहुंचना सबसे आसान है। हिंदुस्तान में सबको पता है मेरा ऑफिस किधर है। आप मेरे ऑफिस में वॉक इन कर सकते हैं, आप अपना इंट्रोडक्शन वीडियो छोड़ सकते हैं।
मुंबई में रहने वाले लोग भी निर्धारित समय के दौरान मेरे ऑफिस आ सकते हैं। सिफारिश करने और फिल्मी बैकग्राउंड की बजाय मुकेश छाबड़ा ने टेलेंट को ज्यादा महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हर कोई उम्मीद के साथ फोन करता है और यह अच्छी बात है। लेकिन अंततः कास्टिंग सही होनी चाहिए। जिसके पास सही प्रतिभा होगी, वही आगे बढ़ेगा।
उभरते हुए कलाकार मेंटल हेल्थ का रखें ख्याल
मुंबई से बाहर टेलेंट की खोज करने को लेकर कास्टिंग डायरेक्टर ने कहा कि भारत प्रतिभाओं से भरा है। व्यक्तिगत या आर्थिक कारणों से हर कोई मुंबई नहीं आ सकता, इसलिए हम उन्हें खोजने के लिए अलग-अलग शहरों में जाते हैं। लोकल टेलेंट फिल्मों में एक अथेंटिसिटी लाते हैं।
उभरते हुए कलाकारों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि अगर आपने इस फील्ड को चुना है, तो कड़ी मेहनत करें। संघर्ष के दौरान खुश रहें और अपनी मेंटल हेल्थ का ख्याल रखें। मुझे लगता है कि जैसे-जैसे मेरे काम से अपेक्षाएं बढ़ती जा रही हैं, मुझे जिम्मेदारी का बढ़ता हुआ एहसास हो रहा है।
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