पारदर्शी आबकारी नीति से सरकार की कमाई में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
नौ चरणों में ठेकेदारों की संख्या 489 से बढ़कर करीब 860, छोटे निवेशकों को बड़ा अवसर
भोपाल, बुधवार। राज्य सरकार की नई आबकारी नीति ने इस वर्ष राजस्व और प्रतिस्पर्धा—दोनों मोर्चों पर उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है। नवीनीकरण व्यवस्था समाप्त कर पारदर्शी नीलामी प्रणाली लागू किए जाने से वर्षों से चले आ रहे शराब कारोबार के मोनोपाली ढांचे को बड़ा झटका लगा है। सरकार के अनुसार, नौ चरणों की नीलामी में 12,268.28 करोड़ रुपये के वार्षिक आरक्षित मूल्य के विरुद्ध 15,278.79 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जो निर्धारित 20% लक्ष्य से अधिक 24.54% वृद्धि दर्शाता है। आबकारी विभाग के सूत्रों के मुताबिक, 20% वृद्धि लक्ष्य हासिल करने के लिए लगभग 4,359 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व की आवश्यकता थी। फिलहाल दसवां चरण जारी है, जिसमें 5,230 करोड़ रुपये का आरक्षित मूल्य रखा गया है। अभी तक इस चरण में करीब 3,000 करोड़ रुपये की बोली लग चुकी है और इससे अधिक राजस्व प्राप्त होने की संभावना जताई जा रही है।
पिछले वर्ष से 1650 करोड़ अधिक राजस्व प्राप्त हुआ
विशेष बात यह है कि यदि वर्तमान स्तर की बोली को ही अंतिम रूप दे दिया जाए, तब भी सरकार को पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1,650 करोड़ रुपये अधिक राजस्व प्राप्त होगा। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस वर्ष सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कोई वृद्धि नहीं की है। सामान्यतः ड्यूटी बढ़ने से राजस्व स्वतः बढ़ जाता है, लेकिन बिना कर वृद्धि के इस स्तर की बढ़ोतरी को नीति की सफलता माना जा रहा है।
आबकारी कमिश्नर दीपक सक्सेना की सूझबूझ से सफलता मिली कुछ बड़े समूहों का दबदबा
नई नीति का सबसे बड़ा प्रभाव बाजार संरचना पर देखने को मिला है। शराब दुकान कारोबार पर लंबे समय से कुछ बड़े समूहों का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार प्रतिस्पर्धा नीलामी ने इस व्यवस्था को तोड़ दिया।इसका सीधा लाभ छोटे निवेशकों और मध्यम बजट वाले व्यवसायियों को मिला है। आबकारी नीति की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना की सूझबूझ, पारदर्शी कार्यशैली और दूरदर्शी प्रशासनिक रणनीति को प्रमुख कारण माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में नवीनीकरण की पुरानी व्यवस्था समाप्त कर खुली और प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रणाली लागू की गई, जिससे वर्षों पुरानी मोनोपाली टूटी और छोटे निवेशकों के लिए नए अवसर खुले। यही वजह है कि बिना एक्साइज ड्यूटी बढ़ाए भी राज्य को रिकॉर्ड राजस्व वृद्धि प्राप्त हुई, जो न केवल नीति निर्माण की सफलता है बल्कि आयुक्त स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग और निर्णय क्षमता का भी प्रमाण है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष जहां 489 ठेकेदार कारोबार में सक्रिय थे, वहीं इस वर्ष यह संख्या बढ़कर करीब 860 पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि राजस्व संग्रह और पारदर्शिता में भी सुधार होगा।
मोनोपाली व्यवस्था ध्वस्त
नवीनीकरण नीति समाप्त खुली,नीलामी से प्रतिस्पर्धा बढ़ी नौ चरणों में 24.54% राजस्व वृद्धि,दसवें चरण से और बढ़ोतरी की संभावना,एक्साइज ड्यूटी बढ़ाए बिना रिकॉर्ड आय,छोटे निवेशकों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि,शराब कारोबार की पुरानी मोनोपाली व्यवस्था कमजोर हुई नीति के इस परिणाम को सरकार वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और व्यापक भागीदारी की दिशा में बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रही है।
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