बीजेपी कैसे आसानी से चुन लेती है सरप्राइज सीएम
नई दिल्ली । सीएम को लेकर अंतिम निर्णय निश्चित रूप से केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से किया जाता है। केंद्रीय नेतृत्व 2014 से दस बार विभिन्न राज्यों में सीएम बदल चुका है। इसमें उत्तराखंड और गुजरात में दो-दो बार मुख्यमंत्री बदलना शामिल है। सीएम बदलने के इस बड़े काम को संभालना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राज्यों और बीजेपी के कार्यकर्ताओं में व्यापक अपील का स्पष्ट प्रतिबिंब है। इससे उन्हें सीएम नियुक्त करने और बदलने में पूरा नियंत्रण मिलता है। तथ्य यह है कि बीजेपी ने 2014 के बाद 12 मौकों पर काफी लो प्रोफाइल वाले नए चेहरे नियुक्त किए हैं। इनमें 2024 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले और एक के बाद चार शामिल हैं। यह भी एक कड़ा संदेश देता है। पार्टी के एक नेता ने समझाया कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व एक ऐसा सख्त शासन चलाना चाहता है जिसमें कोई भी क्षेत्रीय नेता संगठन से बड़ा न हो और पार्टी की राज्य इकाइयां संगठन/कैडर संचालित होनी चाहिए, न कि व्यक्तित्व संचालित। इसके अलावा अन्य राज्य जहां बीजेपी ने सीएम बदले हैं उनमें हरियाणा, गोवा, कर्नाटक और त्रिपुरा शामिल हैं। बीजेपी ने असम और मध्य प्रदेश में चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री के रूप में भी नए चेहरों को चुना। सीएम बदलने के बाद इनमें से कई नेताओं को केंद्र का हिस्सा बना दिया गया। इनमें असम के पूर्व सीएम सर्बानंद सोनोवाल और शिवराज चौहान जो वर्तमान में केंद्रीय मंत्री हैं। इसी तरह, हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर भी केंद्रीय मंत्री हैं। 2014 में सीएम पद के लिए चुने गए कई नेता ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाए और लोकसभा में हैं। ऐसे नेताओ में हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर, उत्तराखंड में त्रिवेंद्र रावत, कर्नाटक में बसवराज बोम्मई, त्रिपुरा में बिप्लब देब शामिल हैं। झारखंड के पूर्व सीएम रघुबर दास को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।'
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