पंच प्रयाग को इसलिए माना जाता है पवित्र
नदियों का संगम सनातन धर्म में बहुत ही पवित्र माना जाता है। जिन जगहों पर इनका संगम होता है उन्हें प्रयाग कहा जाता है और इन्हें प्रमुख तीर्थ मानकर पूजा जाता है।
अलकनंदा-भागीरथी नदियों के संगम पर ‘देवप्रयाग’
अलकनंदा और भागीरथी नदियों के संगम पर देवप्रयाग स्थित है। इसी संगम स्थल के बाद इस नदी को गंगा के नाम से जाना जाता है। गढ़वाल क्षेत्र में भागीरथी नदी को सास और अलकनंदा नदी को बहू कहा जाता है। भागीरथी के कोलाहल भरे आगमन और अलकनंदा के शांत रूप को देखकर ही इन्हें यह संज्ञा मिली है। देवप्रयाग में शिव मंदिर और रघुनाथ मंदिर हैं। देवप्रयाग में कौवे दिखाई नहीं देते, जो एक आश्चर्य की बात है। स्कंद पुराण के केदारखंड में इस तीर्थ का विस्तार से वर्णन मिलता है कि देव शर्मा नामक ब्राह्मण ने सतयुग में निराहार सूखे पत्ते चबाकर और एक पैर पर खड़े होकर एक हजार वर्षों तक तप किया और भगवान विष्णु के दर्शन कर वर प्राप्त किया। मान्यता के अनुसार भगीरथ के ही कठोर प्रयासों से गंगा धरती पर आने के लिए राजी हुई थीं और यहीं वह सबसे पहले प्रकट हुईं।
देवप्रयाग एक प्रसिद्ध जगह है। यहां आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ मानसिक शांति के तलाश में भी लोग आते हैं।
इस प्राकर जाएं : देवप्रयाग दिल्ली-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 58 पर स्थित देवप्रयाग की दिल्ली से दूरी 295 किमी रह जाती है। ऋषिकेश से यह सिर्फ 73 किमी दूर है। ऋषिकेश से देवप्रयाग स्थल पहुंचने के लिए तीन घंटे सफर तय करना होगा। यहां बस या टैक्सी से आसानी से पहुंच सकते हैं।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (26 फ़रवरी 2026)
छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा, सीएम साय का कांग्रेस पर हमला
रीवा के केमिकल-फ्री रंगों की देशभर में डिमांड, मंदिरों के फूलों से बन रहा होली का गुलाल
जबलपुर में 5 अफगानी घुसपैठिए 10 मार्च तक न्यायिक रिमांड पर, दमोह में बनवाए थे फर्जी पासपोर्ट
विधानसभा में गूंजा निराश्रित गौवंश का मुद्दा
बेटी की लव मैरिज से नाराज़ पिता बना ‘बुलडोजर बाबा’, JCB से दामाद का घर ढहाया
Madhya Pradesh में इंडस्ट्रियल मीट पर 201 करोड़ खर्च
70 महीनों में 715 कैदियों की मौत का खुलासा
Seoni के स्कूलों में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर
Bhopal के बड़े तालाब पर बढ़ता अतिक्रमण