सुपीम कोर्ट ने नाबालिग को 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को गर्भपात की दी अनुमति
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 17 साल की एक नाबालिग लड़की की 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को गर्भपात करने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि किसी महिला, खासकर नाबालिग को, उसकी इच्छा के खिलाफ प्रेग्नेंसी जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जवल भुयान की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट के सामने मामला एक नाबालिग लड़की का था, जो पड़ोस के एक लड़के के साथ रिश्ते के दौरान प्रेग्नेंट हो गई थी और उसने मांग की है कि उसकी प्रेग्नेंसी खत्म कर दी जाए।
कोर्ट ने हॉस्पिटल को निर्देश दिया कि वे सावधानियों को ध्यान में रखते हुए लड़की का गर्भपात करें। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया था कि यदि गर्भावस्था को पूरा समय दिया जाए तो मां और बच्चे की जान को कोई खतरा नहीं है। इसके बावजूद कोर्ट ने कहा कि मां की इच्छा और उसका अपने शरीर पर अधिकार सबसे ज्यादा जरूरी है। अगर कोई महिला, खासकर नाबालिग प्रेग्नेंसी जारी नहीं रखना चाहती तो कोर्ट उसे मजबूर नहीं कर सकता।
कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब 24 हफ्ते तक गर्भपात की अनुमति हो सकती है, तो फिर 30 हफ्ते में क्यों नहीं। कई बार किसी महिला को यह फैसला लेने में समय लगता है कि वह प्रेग्नेंसी खत्म करना चाहती है या नहीं। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यदि अदालतें ऐसे मामलों में मेडिकल टर्मिनेशन की अनुमति नहीं देतीं तो महिलाएं गैर-कानूनी और असुरक्षित तरीकों का सहारा लेने को मजबूर होती हैं। झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाएंगी जो खतरनाक हो सकता है।
नेपाल PM बालेश शाह की बढ़ीं मुश्किलें, सत्ता संभालते ही विरोध तेज
अभिषेक शर्मा का 'विराट' धमाका: टी20 में सबसे तेज 9 शतक लगाने वाले पहले भारतीय बने।
IPL 2026: कगिसो रबाडा का कथित 'स्मोकिंग' वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस।
क्या स्पर्श से अपवित्र हो जाते हैं देवता? सबरीमाला सुनवाई में उठा बड़ा सवाल
दिल्ली में आज BJP की अहम बैठक, मेयर-डिप्टी मेयर के नामों पर फैसला संभव
सिविल सेवा दिवस पर स्कूल शिक्षा विभाग का परचम; 'साधना सप्ताह' में मिला प्रदेश में तीसरा स्थान।
तमिलनाडु-बंगाल में चुनावी शोर थमा, कल डाले जाएंगे वोट