बांग्लादेश के विदेश मंत्री अगले महीने भारत दौरे पर आएंगे।
नई दिल्ली। अंतरिम सरकार के दौरान बिगड़े भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय रिश्ते वापस पटरी पर लौटने के आसार हैं। बांग्लादेश की नवनिर्वाचित तारिक रहमान सरकार के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान अगले महीने के पहले हफ्ते भारत आएंगे। शुक्रवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर की भारत स्थित बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह की मुलाकात के बाद ये जानकारी सामने आई है। गौरतलब है कि बीते साल के अंतिम दिन पूर्व पीएम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने बांग्लादेश गए जयशंकर ने अपने बांग्लादेशी समकक्ष को भारत आने का न्योता दिया था। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह मुलाकात आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित थी। सूत्रों के मुताबिक विदेश मंत्री रहमान 8 अप्रैल को हिंद महासागर सम्मेलन में शिरकत करने के क्रम में दिल्ली होते हुए मॉरीशस जाएंगे। इससे पूर्व भारत ने बांग्लादेश में नई सरकार के गठन का स्वागत किया था और प्रधानमंत्री मोदी ने तब बीएनपी के मुखिया और वर्तमान पीएम तारिक रहमान को फोन कर बधाई दी थी। बाद में उनके शपथ ग्रहण में शामिल होने बांग्लादेश गए लोकसभा स्पीकर ने पीएम रहमान को मोदी का पत्र सौंपा था, जिसमें उन्हें भारत आने का न्यौता दिया गया था।
ऊर्जा संकट के बीच बढ़ी नजदीकी
यूं तो नई सरकार के गठन के बाद से ही दोनों ओर से द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने की पहल हुई, मगर इसमें पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट ने भी अहम भूमिका निभाई। इस दौरान बांग्लादेश ने भारत से 50 हजार टन डीजल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। भारत इस अनुरोध के मद्देनजर पहली खेप के तहत 5,000 टन डीजल भेजने के साथ उपलब्धता के आधार पर और मदद करने के संकेत दे चुका है।
अंतरिम सरकार में रहते भी की थी संबंध बेहतर करने की पहल
अंतरिम सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहते विदेश मंत्री रहमान ने दोनों देशों के बिगड़ते रिश्ते को ठीक करने की पहल की थी। तब दिल्ली दौरे पर आए रहमान ने एनएसए अजित डोभाल से बात की थी। गौरतलब है कि रहमान इकलौते शख्स हैं, जिन्हें अंतरिम सरकार के साथ नई सरकार में भी शामिल होने का अवसर मिला।
धीरे-धीरे आगे बढ़ने की रणनीति...
दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यार्पण का है। हालांकि संकेत हैं कि इस मुख्य मुद्दे से पहले दोनों देश अन्य मामलों में नरमी लाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं। इस क्रम में इस दौरे को भी देखा जा रहा है।
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